कभी यहाँ कभी वहाँ घर घर जाए माखन चोर देखो माखन चुराए
कभी यहाँ कभी वहाँ घर घर जाए
माखन चोर देखो माखन चुराए
कभी यहाँ कभी वहाँ घर घर जाए
माखन चोर देखो माखन चुराए
जाने कैसे नटखट छेका उतरे
माखन खाए ग्वालो को खिलाए
फोड़े मटकी दही बिखराए
पीच्चे पीच्चे भागू पकड़ ना आए
कभी यहाँ कभी वहाँ घर घर जाए
माखन चोर देखो माखन चुराए
डरता नही है करे बरजोरी
चोरी तो चोरी उसपे सीना ज़ोरी
मटक मटक कर करता तिठोली
आँखे ललचाए खड़े खड़े मुस्काये
कभी यहाँ कभी वहाँ घर घर जाए
माखन चोर देखो माखन चुराए
बतिया बनाए पेर भेद खुल जाए
मुख पेर माखन छुपे ना छुपाये
यशोदा की च्छड़ी से वो तोड़ा दर जाए
मैने ना चुराया माखन सौगंध खाए
कभी यहाँ कभी वहाँ घर घर जाए
माखन चोर देखो माखन चुराए



