बरसाने की लाड़ली पे मैं वारी वारी जाऊं री
ब्रज की रज में स्वर्ग बसा है, महलों में वो बात कहाँ,
राधा नाम की जो मस्ती है, वो किसी और स्वाद में कहाँ।
छोड़ दिए सब ठाठ बाट, अब तो मन बस एक हीं हठ ठाने,
मिल जाये मोहे लाड़ली अपनी, फिर कछु और ना ये जिया माने,
हे श्यामा राधे राधे
लाड़ली, लाड़ली, मेरी ठकुरानी,
राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे,
बरसाने की लाड़ली पे, मैं वारी वारी जाऊं री,
ब्रज की ये अनुराग में, मैं तो डूब हीं जाऊं री,
ओ मेरी श्यामा जू-०२
मेरे राधा का नाम अति अनमोल है,
मेरे ह्रदय की धड़कन का ये ढ़ोल है,
बरसाने की लाड़ली पे, मैं वारी वारी जाऊं री।
और इस भजन का भी रसपान करें: पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे
तेरी मंद-मंद मुस्कान, तेरी भौंहे कजरारी-०२
छीन लियो मेरे चैन, हे वृष भानु दुलारी,
तेरो रूप है पावन, तू है त्रिभुवन स्वामिनी,
जैसे सावन की नभ में, चमके सौ दामिनी,
मस्त मलंग होय के झूमूँ, तेरी रज को माथे चूमूँ,
मैं तो बनके सवाली, तेरे द्वारे पे आऊं री,
बरसाने की लाड़ली पे, मैं वारी वारी जाऊं री।
कोई कहे बौरी मोहे, कोई कहे दीवानी,
राधे राधे बोल के, मैं भाई रे मस्तानी-०२
मोहे जग से ना नाता, मोहे काहू से क्या,
मेरी भक्ति भी तू, मेरी मुक्ति भी तू,
तेरी कृपा का रस पी के, प्रेम रंग में जी के,
मैं तो भक्ति के पद, नित अब गुनगुनाऊं री,
बरसाने की लाड़ली पे, मैं वारी वारी जाऊं री,
सुनो हे करुणामयी, मेरी विनती ये मानलो,
अपनी दासी जान के, चरणों में स्थान दो,
मैं तो हार गयी कबसे, अब शरण तुम्हारी है,
तू हीं मेरी जीवन नैया, तू हीं खेवन हारी है,
तेरी छवि जो निहारूं, तन-मन अपना वारूँ-०२
मैं तो राधे राधे जपके, परम पद पा जाऊं री-०२
राधे राधे राधे-०३
मेरी श्यामा,
मेरी राधे,
तू हीं मेरो जप-तप, तू हीं मेरी साधना,
तुझसे हीं आरम्भ, तुझपे अंत मेरी आराधना-०२
राधे राधे राधे राधे….

