मात पिता और बंधु सखा सब कुछ प्रभुजी तुम मेरे

  • Maat Pita Aur Bandhu Sakha Sab Kuchh Prabhuji Tum Mere

मात पिता और बंधु सखा
सब कुछ प्रभुजी तुम मेरे।।

मात पिता और बंधु सखा
सब कुछ प्रभुजी तुम मेरे।।

हम है तुम्हारे तुम अपने हो
भव हरदाये में सदा धरे
मात पिता और बंधु सखा
सब कुछ प्रभुजी तुम मेरे।।

सबको आस तुम से भगवान
तुम ना बर्बाद कभी करते।।

नाम अनेक अनेक रूप से
ह्रदय कलश सदा भरते।।

दीन बंधु हम भी आशा से
दीन भाव से आज करे।।

हम हैं तुम्हारे तुम अपने हो
भव ह्रदय में सदा धरे
मात पिता और बंधु सखा
सब कुछ प्रभुजी तुम मेरे।।

माया का ही ध्यान धारू पर
माधव नाम कभी ना लिया।।

विषय का विष पिया है हरदम
सत्संग का अमृत ना पिया।।

दोष बुरा कर कृपा सिंधु आब
अपनी कृपा के जल से भरे।।

हम हैं तुम्हारे तुम अपने हो
भव हरदाये में सदा धरे
मात पिता और बंधु सखा
सब कुछ प्रभुजी तुम मेरे।।

ज्ञान की ऐसी ज्योत जगड़ो
अंधार हो दूर सबी।।

तुम अनंत करुणा सागर हो
ये विश्वास ना देंगे कभी।।

निर्मल जीवन करदो ऐसा
सदा पाप से मन ये डरे।।

तुम से ही तन मन की कहते
तुम्हें छोड़ कर जाए कहा।।

तुमि हे हरि सब दुख हरते
तुम्हें पुकारे चाहे जहां
गज की रक्षा कर जहां से
उसी रूप से कस्त हरे।।

हम हैं तुम्हारे तुम अपने हो
भव ह्रदय में सदा धरे
मात पिता और बंधु सखा
सब कुछ प्रभुजी तुम मेरे।।

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