जगु जान सन्मुख जन्मु कर्मु प्रतापु पुरुषारथु महा

  • Jagu Jaan Sankukh Janmu Karmyu Pratapu Purusharthu Maha

जगु जान सन्मुख जन्मु कर्मु प्रतापु पुरुषारथु महा।
तेहि हेतु मैं बृषकेतु सुत कर चरित संछेपहिं कहा॥
यह उमा संभु बिबाहु जे नर नारि कहहिं जे गावहीं।
कल्यान काज बिबाह मंगल सर्बदा सुखु पावहीं॥

हिंदी अर्थ –
स्वामिकार्तिक के जन्म, कर्म, प्रताप और महान् पुरुषार्थ को सारा जगत् जानता है। इसलिए मैंने शिव के पुत्र का चरित्र संक्षेप में ही कहा है। शिव-पार्वती के विवाह की इस कथा को जो स्त्री-पुरुष कहेंगे और गाएँगे, वे कल्याण के कार्यों और विवाहादि मंगलों में सदा सुख पाएँगे।

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