द्वार खड़ी शनिदेव तुम्हारे
द्वार खड़ी शनिदेव तुम्हारे, कृपा करो शनि दया करो-०२
करूँ तुम्हारी चरण वंदना, कष्ट हमारी विदा करो,
द्वार खड़ी शनिदेव तुम्हारे।
तुमको है मालूम सभी कुछ, घेर खड़े हैं गम कितने,
तुमसे नहीं तो किससे कहें, लाचार बड़े हैं हम कितने,
तुमसे है ये विनती मेरी, क्षमा करो अपराध मेरे,
भीड़ दुखों की घेर खड़ी है, कोई नहीं है साथ मेरे,
करूँ तुम्हारी चरण वंदना, कष्ट हमारी विदा करो,
द्वार खड़ी शनिदेव तुम्हारे।
दुनिया की क्या बात करूँ मैं, परछाई भी दुश्मन है,
राहें हो गयी अंगारों सी, आग में जलता जीवन है,
हाथ धरो मेरे सिर के ऊपर, शीतल सी छाया करदो,
हो जाएँ दुःख दूर हमारी, तुम ऐसी माया करदो,
करूँ तुम्हारी चरण वंदना, कष्ट हमारी विदा करो,
द्वार खड़ी शनिदेव तुम्हारे।
चालीसा पाठ : शनिदेव चालीसा
कब काटोगे देव हमारी, किस्मत की जंजीरों को,
रंग दो खुशियों से हाथो की इन बैरंग लकीरों को,
न्याय करो हे न्याय देवता, दर दर की ठुकराई हूँ,
न्याय मिलेगा यही सोच के, द्वार तुम्हारे आई हूँ,
करूँ तुम्हारी चरण वंदना, कष्ट हमारी विदा करो,
द्वार खड़ी शनिदेव तुम्हारे, कृपा करो शनि दया करो-०२
करूँ तुम्हारी चरण वंदना, कष्ट हमारी विदा करो,
द्वार खड़ी शनिदेव तुम्हारे।


