जब कोई तकलीफ सताए जब जब मन घबराता है

  • Jab Koi Taklif Sataye Jab Jab Man Ghabrata Hai

जब कोई तकलीफ सताए जब जब मन घबराता है
मेरे सिरहाने खड़ा कन्हैया सर पे हाथ फिराता है।।

लोग ये समझे मैं हूँ अकेला मेरे साथ कन्हैया है
लोग ये समझे डूब रहा में चल रही मेरी नैया है
जब जब लहरें आती है ये खुद पतवार चलाता है
मेरे सिरहाने खड़ा कन्हैया।।

जिनके आंसूं कोई ना पोछें कोई ना जिनसे प्यार करे
जिनके साथ ये दुनियां वाले मतलब का व्यव्हार करे
दुनियां जिसको ठुकराये उसे ये पलकों पे बिठाता है
मेरे सिरहाने खड़ा कन्हैया।।

प्रेम की डोर बंधी प्रीतम से जैसे दीपक बाती है
कदम कदम पर रक्षा करता ये सुख दुःख का साथी है
‘संजू’ जब रस्ता नहीं सूझे प्रेम का दीप जलाता है
मेरे सिरहाने खड़ा कन्हैया।।

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