नैन बरसे रात अँधेरी

  • Nain Barase Rat Andheri

कृष्णा रे यूँ मत जानियो तू , बिछड़े मोहे चैन जैसे,
जैसे जल बिन मछली, तड़पत है दिन रैन।

नैन बरसे रात अँधेरी, पिया बिन कौन सहारा रे,
भीतर-भीतर बिरह जलावे, तन मन भया अंगारा रे,
कैसे काटूं सांझ सवेरे, पिया बिन मन डोले रे,
भीतर जलत है बिरह की अग्नि, नैनन नीर झलके रे

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पवन चले तो संदेसा आ पूछूं, बादल से बतियायूँ,
कौन डगर से आओ मोहन, राह तुम्हारी निहारूं,
फूल खिले वन वन उपवन में, मुझको कुछ ना भाये,
तेरे दर्शन बिन हे सांवरिया, जग सारा बिसराये,
एक झलक की आस लगाए , जीवन बिता जाए,
अब तो दर्शन दे दो मोहन, प्राण पिया बिन जाए,
कृष्णा….
आ आ आ आ आ……

आओ पिया अब देर ना करना, हीरा पीर ना सह पाए,
एक तुम्हारे दर्शन बिन मोहन, जीते जी मर जाए।


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