सुनो जी मेरी बालाजी हनुमान मेहंदीपुर हनुमान
मेरी बात बिगड़ती जावे
कुछ नही समझ में आवे
हो रहा सू बहुत घाना परेशन
सुनो जी मेरी मेहंदीपुर हनुमान
सुनो जी मेरी बालाजी हनुमान।।
दुनिया घनी ठोकर ख़ाके
बैठा सू मैं घर लुटवाके ।।
बैठा संकट पंख फैलक़े
किसने दर्द सुनौउ मैं जाके
जान मेरी हो रही घनी वीरान
सुनो जी मेरी बालाजी हनुमान
सुनो जी मेरी सालासर हनुमान।।
बाबा बिगड़ी बात बनादे
मेरा बेड़ा पार लगादे।।
अब तो अपनी गाड़ा घुमा दे
संकट ने बाबा धूल चटा दे।।
बचाले अपने भगत के प्राण
सुनो जी मेरी मेहंदीपुर हनुमान
सुनो जी मेरी बालाजी हनुमान।।
चाँदी की तेरी गाड़ा चढ़ा दू
सवा मानी का मैं भोग लगा दू
देशी गाये के लड्डू का
बाबा तेरा मैं प्रसाद बनादू।।
बात का करदे रे तू समाधान
सुनो जी मेरी सुनोजी मेरी
सुनो जी मेरी सालसर हनुमान
सुनो जी मेरी बजरंगी बलवान
सुनो जी मेरी बालाजी हनुमान।।
दुनिया में तेरा खेल निराला
खोलदे बंद किशमत।।
विकी केथाल शहर आला
तेरी रट ता रहता तेरी माला।।
गिरी का भी करले कुछ ध्यान
सुनो जी मेरी बजरंगी बलवान
सुनो जी मेरी राम दूत हनुमान।।
मेरी बात बिगड़ती जावे
कुछ नही समझ में आवे
हो रहा सू बहुत घाना परेशन
सुनो जी मेरी मेहंदीपुर हनुमान
सुनो जी मेरी बालाजी हनुमान।।
