शिकायत भी तुझसे है बाबा और भरोसा भी
थक गया हूँ लड़ते लड़ते, अब हिम्मत नहीं बाकी,
टूटी है सांसे मेरी, बुझने को है ये झांकी,
हार गया हूँ दुनिया से, अब तेरे दर पे आया हूँ,
श्याम मैं अपनी किस्मत का, मारा हुआ सताया हूँ,
शिकायत तुमसे है बाबा, पर भरोसा भी तुम्हीं पर है,
की जिसकी हार निश्चित हो, उसका ठिकाना तेरे दर पर है।
लोग कहते हैं तुझे, तू हारे का सहारा है,
फिर क्यों मेरे जीवन में, फैला ये अँधेरा है,
क्या मेरी आँखों के आंसू, तुझे दिखते नहीं मोहन,
क्यों सुना पड़ा है वर्षों से, मेरे खुशियों का ये आँगन,
हर मोड़ पर मैं गिरा, अपनों ने भी मुख मोड़ लिया,
जिस पर किया था मान मैंने, उसी ने दिल ये तोड़ दिया,
क्या यही इंसाफ है तेरा, क्या यही तेरी माया है,
मैंने तो हर कदम पे बाबा, बस तेरा नाम ध्याया है,
रिश्तों की धुप में जलकर, मैं राख सा हो गया हूँ,
भीड़ है चारो तरफ, पर मैं कहीं खो गया हूँ,
उम्मीद की एक लव थी, वो भी अब बुझ रही है,
मेरी किस्मत की ये उलझन, अब और उलझ रही है,
सिखाया था दुनिया ने, की तू साथ निभाता है,
पर मेरे वक्त पे बाबा, तू क्यों नजर नहीं आता है।
और इस भजन का भी रसपान करें: खाटू को श्याम रंगिलो रे
कहतें है जिसे कलयुग का देव, वो खामोश क्यों बैठा है,
मेरे घावों को देखकर मेरा सांवरा, क्यों ऐंठा है,
मगर फिर याद आता है, कि तूने कितनों को तारा है,
जिसका कोई नहीं जग में, उसका तू हीं सहारा है,
मैं बुरा हूँ मैं पापी हूँ, जैसा भी हूँ तुम्हारा हूँ,
दुनिया ने दुत्कारा है, पर मैं तेरा हीं दुलारा हूँ,
चाहे जितना रुला ले तू, मैं दर से नहीं जाऊंगा,
जबतक तू ना थामेगा, मैं यहीं पे मर जाऊंगा,
मेरे नैया के मांझी श्याम, पतवार अब तेरे हांथो में,
भरोसा फिर से जागा है, इन बहते हुए अश्कों में,
हार के आया हूँ श्याम, अब जीत दिलाना काम तेरा,
जग हंसे तो हंसे, पर डूबे ना नाम तेरा,
जय श्री श्याम, मेरा हाँथ पकड़ लो श्याम-०२



