ये भाग्य अभागे का जगा दो हे राम जी
ये भाग्य अभागे का जगा दो हे राम जी
करुणानिधान भोग लगा दो हे राम जी
शबरी के मीठे बेर ये तंदुल विदुर के हैं
ठुकरा ना देना इनको ये दो टुकड़े दिल के हैं
अमृत मेरे भोजन को बना दो हे राम जी
करुणानिधान भोग लगा दो हे राम जी
अर्पण है प्रभू आपको ये भेंट दास की,
ज्योती जलाये बैठा हूँ मुद्दत से आस की,
कब आयोगे ये बात बता दो हे राम जी,
करुणानिधान भोग लगा दो हे राम जी
कहतें हैं कोई आप सा दीलेर नहीं है,
प्रभू आप के घर देर है अन्धेर नहीं है,
हो कितने दयावान दिखा दो हे राम जी,
करुणानिधान भोग लगा दो हे राम जी
जो रूठोगे प्रभू तो मैं भी रूठ जायुंगा,
खाओगे नहीं तुम जो तो मैं भी ना खायुंगा,
ये ज़िद है मेरी आज पुगा दो हे राम जी,
करुणानिधान भोग लगा दो हे राम जी

