विनती यही मा दुर्गे जब प्राण तन से निकले
विनती यही मा दुर्गे
जब प्राण तन से निकले
लब हो नाम तेरा
जब प्राण तन से निकले।।
हो चुनरी लाल सर पे
मुस्कान हो आधार पे।।
मा अंबे मेरे घर हो
जब प्राण तन से निकले
विनती यही मा दुरगे
जब प्राण तन से निकले।।
मान मोहनी छवि हो
तेरी भक्ति मन बसी हो।।
कोई चाह और नही हो
जब प्राण तन से निकले।।
विनती यही मा दुरगे
जब प्राण तन से निकले।।
जब अंत काल आए
कोई दर्द नही सताए।।
बस दर्श तूही दिखाए
जब प्राण तन से निकले।।
विनती यही माँ दुर्गे
जब प्राण तन से निकले
लब हो नाम तेरा
जब प्राण तन से निकले।।
