वन जाने हते केकई काहे दोष लगाय रे
राम तुम्हारी महिमा को ये संसार ना जाने
केकई करण तजे चाहहे हमरो जिया नहीं माने।।
करण कोई और नफरत जे करण तुम वन आए
सच्ची सांची राम कहे केकई दोश लागे रे।।
वन जाने हते केकई काहे दोष लगाय रे
वन जाने हते केकई काहे दोष लगाय रे।।
शबरी नाम की एक भीलानी राम भजन करती थी
आएंगे एक दिन मोरे सैंया यही नान रत्ती थी
मीठी मीठी पाके बेर राखे थी तुम्हारे लाने
सबरी तराने आप गए द बिरसा करे बहाने
बेर खाने हते केकई के दोष लगे रे।।
कछु को जनम दियो गंगा को पर लगाइया
आपही को तो पार लगावे केवट लेकर नैया।।
पिछले जन्म की आशा अधूरी आपने करदी पूरी
केवट चरण कमल धोये तार गायो ऐसी चरण की धूलि
केवट तराने हते केकई को दोष लगाये रे।।
रावण गरवा किए अति भारी साइट लायी चुराई
राम हाथ से मुक्ति पौ या से सिया चुरायी।।
बाली मार मार मारीच जाता कोनि जाए
जाए विभीषण लंका देदी बोलो हे रघु राय।।
रावण मरणे नफरत केकई को दोष लगाये रे
वन जाने हते केकई काहे दोष लगाय रे।।
हे रावण मरणे हाटे
बाली मरणे हते
केवट तराने हते
सबरी तराने हते
केकई को दोष लगाये रे
कहे केकई को दोष लगाये रे।।
वन जाने हते केकई काहे दोष लगाय रे
वन जाने हते केकई काहे दोष लगाय रे।।
