सिर पर चुनरी लाल
सिर पर चुनरी है लाल, और सोलह है श्रृंगार,
क्या खूब सजा दरबार, माँ ममता की मूरत हो,
माँ ममता की मूरत हो,
सिर पर चुनरी है लाल, और सोलह है श्रृंगार,
क्या खूब सजा दरबार, माँ ममता की मूरत हो,
माँ ममता की मूरत हो।
सूरत है भोली-भाली, लगती है छवि निराली-०२
तू जग की रखवाली, करती है बेड़ा पार,
सिर पर चुनरी है लाल, और सोलह है श्रृंगार,
क्या खूब सजा दरबार, माँ ममता की मूरत हो,
माँ ममता की मूरत हो।
दरबार तुम्हारा मैया, लगता है बड़ा सुहाना-०२
नित जगमग है ज्योति, गूंजे है जय जयकार,
सिर पर चुनरी है लाल, और सोलह है श्रृंगार,
क्या खूब सजा दरबार, माँ ममता की मूरत हो,
माँ ममता की मूरत हो।
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जगदम्बे शेरावाली, महिमा ना जाए बखानी-०२
हम भक्तों के घर भी, आ जाओ माँ एक बार,
सिर पर चुनरी है लाल, और सोलह है श्रृंगार,
क्या खूब सजा दरबार, माँ ममता की मूरत हो,
माँ ममता की मूरत हो,
सिर पर चुनरी है लाल, और सोलह है श्रृंगार,
क्या खूब सजा दरबार, माँ ममता की मूरत हो,
माँ ममता की मूरत हो-०३
