श्रृष्टि के कण कण में राम

  • Shrishti Ke Kan Kan Mein Ram

जल में राम, थल में राम,
अंबर के आँचल में राम,
श्री राम, जय राम, जय जय राम,
श्री राम, जय राम, जय जय राम ।।

चल में और अचल में राम,
समय के हर एक पल में राम,
श्री राम, जय राम, जय जय राम ।।

चिंतन में आभास में राम,
आती जाती सांस में राम,
श्री राम, जय राम, जय जय राम,
श्री राम, जय राम, जय जय राम।।

दीन जनों की आस में राम,
मिलते हैं विश्वास में राम,
श्री राम, जय राम, जय जय राम,
श्री राम, जय राम, जय जय राम ।।

श्रृष्टि के कण कण में राम,
प्राण में राम, प्रण में राम,
श्री राम, जय राम, जय जय राम,
श्री राम, जय राम, जय जय राम ।।

अर्पण में तर्पण में राम,
अंदर के दर्पण में राम,
श्री राम, जय राम, जय जय राम,
श्री राम, जय राम ।।

जय जय राम, जग है याचक दाता राम,
बंधु सखा पितु माता राम,
श्री राम, जय राम, जय जय राम,
श्री राम, जय राम, जय जय राम।।

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