शिव जी तेरे मंदिर में आकर मेरा मन पावन हो जाता है
शिव जी तेरे मंदिर में आकर, मेरा मन पावन हो जाता है-०२
मेरा मन पावन हो जाता है, मेरा मन पावन हो जाता है-०२
तेरी भोली सूरत देख के शिव, मेरा मन प्रसन्न हो जाता है-०२
शिव जी तेरे मंदिर में आकर, मेरा मन पावन हो जाता है-०२
ये जग सारा बेगाना है, बस तुझको हीं अपना माना है-०४
मैं तेरी हूँ तू मेरा है, ये अपने मन का नाता है-०२
शिव जी तेरे मंदिर में आकर, मेरा मन पावन हो जाता है-०२
पग-पग पर घना अँधेरा है, मुझे लोभ मोह ने घेरा है-०४
ऐसे में तेरा नाम मुझे, एक नयी राह दिखलाता है-०२
शिव जी तेरे मंदिर में आकर, मेरा मन पावन हो जाता है-०२
तू अजर अमर अविनाशी है, तू स्वामी घट घट वासी है-०४
मुझे तेरे सिवा इस दुनिया में, कुछ और नजर नहीं आता है-०२
शिव जी तेरे मंदिर में आकर, मेरा मन पावन हो जाता है-०२
और इस भजन का भी रसपान करें: मेरे भोले तू हीं सहारा है
तेरी धूनी में तेरी मस्ती में, मैं मगन हूँ तेरी भक्ति में-०४
मैं खुद को धन्य समझती हूँ, जब अपने दर पे बुलाता है-०२
शिव जी तेरे मंदिर में आकर, मेरा मन पावन हो जाता है-०२



