संसों की माला पे सिमरू मैं पी का नाम
हर हर में हर हर बेस
और हर को हर की आस
हर हर को मैं ढूंढ फिरी
और हर है मेरा पास।।
प्रीतम हम तुम एक है
जो कहा सुनन में दो है
मन से मन को तोलिये
दो मन कबहु न होए।।
संसों की माला पे सिमरू मैं पी का नाम
मेरे मन की मैं जानू पी के मन की राम।।
संसों की माला पे सिमरू
मैं पेशाब का नाम
मेरे मन की मैं जानू
पी के मन की राम
यही मेरी इल्तिजा है
यही मेरी पूजा है
प्रीतम का कुछ दोष नहीं है
वो तो है निर्दोष
प्रेम की माला को जाते जाते
आप बनी मैं श्याम
संसों की माला पे सिमरू
मैं पेशाब का नाम
तू मेरा यार है
तू मेरा दिलदार है
किसी में कान में हीरा
किसी की नाक में हीरा।।
हमें हीरे से क्या लेना
हमारे श्याम है हीरा
मज़िल तो मिल ही जाएगी
भटक कर ही सही
गुमराह तो वो लोग हैं
जो घर से निकले ही नहीं
वो और होंगे जिनहे
होगी शिकायत तुमसे।।
अरे बंदा नवाज हम तो बस
तुमसे मोहब्बत है
मेरी नज़रो ने वो छता देखी है
लुट गए हम जीस्पर वो आड़ा देखी
श्याम प्यारो के देवानो
को देख कर ऐसा लग रहा है
इन मरिज़ो ने मुद्दतो के बाद
कोई दावा देखी है।।
