राम रस से बढ़के रस कोई नहीं संसार में
राम रस से बढ़के रस कोई नहीं संसार में
राम रस पीले जो डूबेगा न मझधार में
ओ बोलो श्री राम की जय ओ बोलो श्री राम की जय।।
राम रस को पीके हनुमत कूद लंका में गए
राम नाम रस पीके विभीषण शरण प्रभु की आ गए।।
राम रस पीके सबरी बेर लायी प्यार में
राम रस से बढ़के रस कोई नहीं संसार में
राम रस पीले जो डूबेगा न मझधार में
ओ बोलो श्री राम की जय।।
राम रस पीके नारद पा गए सत ज्ञान थे
राम रस में डूब के छोड़े जटायु प्राण थे
राम रास उनको मिला जो जुट गए उपकार में
राम रस से बढ़के रस कोई नहीं संसार में
ओ बोलो श्री राम की जय।।
राम नाम ही सत्य है बस राम ही संसार है
राम नाम ही साधु संतो का बना आधार है
तप गए तो वाल्मीक राम रास के प्यार में।।
राम रस से बड़े रस कोई नहीं संसार में
राम रस पीले जो डूबेगा न मझधार में
ओ बोलो श्री राम की जय।।
राम रस को भरतजी ने अपने कान में भरा
राम रस पीकर तुलसी दास जी ने मानस लिखा।।
राम रस तू भी पीले डूबा क्यों अंधाकार में
राम रस से बढ़के रस कोई नहीं संसार में
ओ बोलो श्री राम की जय।।

