राधे बरसाने वारी तेरो चकार कुंज बिहारी

  • Radhe Barsane Wari Tero Chakar Kunj Bihari

हे रे मैं लखायो आज तोके
बखन कहं लो करे मति मोरी
राधे के शीश पे मोर पाखा
मुरली लिपटी पत में पात डोरी।।

वेणी विराजत लाल के भाल
चुनार रंग में कसू
मन के मोहन बैठे रहे
सो मानवत श्री वृषभान किशोरी

बोलिये प्रिया प्रीतम लाल की जय

राधे बरसाने वारी
तेरो चकर कुंज बिहारी

राधे बरसाने वारी
तेरा चक्कर कुंज बिहारी

राधे बरसाने वारी
तेरो चक्कर बांके बिहारी

तेनो मोहो मन मोहन को मन
तेरे ही करण बन जोगन

नित डोले गली भोले बिहारी
नित डोले गली बिहारी

राधे बरसाने वारी
तेरो चक्कर बांके बिहारी

कबहु मनिहारीन बन आवे
ले ले हरिन बन दाउडो आवे

और कबहु बन ब्रह्मचारी
तेरो चक्कर बांके बिहारी

राधे बरसाने वारी
तेरो चक्कर बांके बिहारी

गहवर वन गए चरे रहो
नित तेरी बात निहार रहो
तन ओढे कँवरी कारी
तेरो चकर कुंज बिहारी

राधे बरसाने वारी
तेरो चक्कर बांके बिहारी

राधे राधे जो कोई बोले
राधा राधा राधा राधा
राधा श्री राधा राधा श्री राधा।।

राधे राधे जो कोई बोले
वही के संग मोहन डोले।।

श्यामा पे श्याम बलिहारी
तेरो चकर कुंज बिहारी।।

राधे बरसाने वारी
तेरो चक्कर बांके बिहारी।।

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