नैनों में बस गए हैं
नैनों में बस गए हैं-०२
श्री बांके बिहारी,
नैनों में बस गए हैं, श्री बांके बिहारी-०४
और मन को मोह रही है-०२
वृष भानु की दुलारी,
नैनों में बस गए हैं-०२
कानों में कुण्डल सोहे, अधरों पे है मुरलिया-०२
जादू जगा रही है, सांवल सी वो सुरतिया,
पागल बना दिया है-०२
मुरली की धुन ने प्यारी,
नैनों में बस गए हैं, श्री बांके बिहारी।
यमुना के तीर दोनों, जब रास हैं रचाते-०२
देवों के मन भी तरसे, दर्शन को दौड़े आते,
इन चरणों में बिता दूँ-०२
मैं उम्र अपनी सारी,
नैनों में बस गए हैं, श्री बांके बिहारी।
मूरत है कितनी पावन, सूरत है कितनी प्यारी-०२
चन्दन का भाल माथे, सजती हैं बिंदी न्यारी,
इनपे है पीला पटुका, उनपे है लाल साड़ी-०२
नैनों में बस गए हैं, श्री बांके बिहारी।
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मुरली की धुन पे नाचे,, ये सारी ब्रज नागरिया-०२
सबको पिया मगन है, छोड़ के सब डगरिया-०२
दीवानी हो गयी है-०२
दुनिया की भीड़ सारी,
नैनों में बस गए हैं, श्री बांके बिहारी।
भटका था मैं जनम से, अब मिल गया ठिकाना-०२
अपना ये सारा जीवन, चरणों में है बिताना,
कर दो दया की दृष्टि-०२
मैं हूँ शरण तिहारी,
नैनों में बस गए हैं, श्री बांके बिहारी,
और मन को मोह रही है, श्री वृष भानु की दुलारी।


