मुझे कहाँ मिलेंगे भोलेनाथ नंदी बोल जरा
मुझे कहाँ मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी बोल जरा-०२
बोल जरा, नंदी बोल जरा-०२
मैं तो ढूंढू दिन और रात, नंदी बोल जरा-०२
मुझे कहाँ मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी बोल जरा-०२
पर्वत नदियों में जाकर ढूँढ़ा-०२
सागर से भी मैंने पूछा ,
वो तो गंगा ले गयी साथ, नंदी बोल जरा-०२
मुझे कहाँ मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी बोल जरा-०२
नील गगन में जाकर ढूँढ़ा-०२
तारों से भी मैं पूछा-०२
चंदा ले गयी साथ, नंदी बोल जरा,
वो तो चंदा ले गयी साथ, नंदी बोल जरा,
मुझे कहाँ मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी बोल जरा-०२
बागों में भी जाकर ढूँढ़ा-०२
फल और कलियों से भी पूछा-०२
भंगिया ले गयी साथ, नंदी बोल जरा,
वो तो भंगिया ले गयी साथ, नंदी बोल जरा,
मुझे कहाँ मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी बोल जरा-०२
और इस भजन से भी आनंदित हों : शंकर तेरी जटा में बहती है गंग धारा
कीर्तन में भी जाकर ढूँढ़ा-०२
भक्तों से भी मैंने पूछा-०२
डमरू ले गए साथ, नंदी बोल जरा,
वो तो डमरू ले गए साथ, नंदी बोल जरा,
मुझे कहाँ मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी बोल जरा-०२
