मेरा सोता कुंवर जगाया है ये मदारी कहाँ से आया है
बोलिये शिव शंकर भगवन की-जय हो !
आइये बताते हैं जब गोकुल में कान्हा ने जन्म लिया तो सभी बधाई देने के लिए आते है। तो एक दिन शिव शंकर भगवान कान्हा जी से मिलने के लिए एक साधु का वेश बनाकर गोकुल में पहुँचते हैं और अलख जगाते है और वहां यशोदा मैया कान्हा जी को सुला रही है और बाहर द्वारे पर शिव शंकर भगवान साधू के वेश में अलख जगा रहे है, सुनिए !
बोलिये शिव शंकर भगवान की- जय हो !
मेरा सोता कुंवर जगाया है, ये मदारी कहाँ से आया है-०४
इनके सिर पे जटा विराजे हैं-०४
ओ मस्तक पे चंदा सजाया है, ये मदारी कहाँ से आया है,
मेरा सोता कुंवर जगाया है, ये मदारी कहाँ से आया है-०४
इनकी जटाओं में गंगा बह रही-०२
हो इनकी जटाओं में गंगा बह रही,
इनकी जटाओं में गंगा बह रही,
और नाग गले लिपटाया है, ये मदारी कहाँ से आया है,
मेरा सोता कुंवर जगाया है, ये मदारी कहाँ से आया है-०४
इनके कानों में बिच्छू लटक रहे-०२
ओ इनके कानों में बिच्छू लटक रहे,
इनके कानों में बिच्छू लटक रहे,
ओ ये कैसा वेश बनाया है, ये मदारी कहाँ से आया है,
मेरा सोता कुंवर जगाया है, ये मदारी कहाँ से आया है-०४
इनके हाथों में त्रिशूल साज रहा-०२
ओ इनके हाथों में त्रिशूल साज रहा,
इनके हाथों में त्रिशूल साज रहा,
और दूजे में डमरू बजाया है, ये मदारी कहाँ से आया है,
मेरा सोता कुंवर जगाया है, ये मदारी कहाँ से आया है-०२
ओ मेरा सोता कुंवर जगाया है, ये मदारी कहाँ से आया है,
मेरा सोता कुंवर जगाया है, ये मदारी कहाँ से आया है।
इनके तन पे मृगछाला लिपटी है-०२
हो इनके तन पे मृगछाला लिपटी है,
इनके तन पे मृगछाला लिपटी है,
हो संग बूढ़ा नंदी लाया है, ये मदारी कहाँ से आया है,
मेरा सोता कुंवर जगाया है, ये मदारी कहाँ से आया है-०४
और इस भजन को भी देखें: शंकर तेरी जटा में बहती है गंग धारा
ये तो मंद मंद मुस्काये रहे-०२
कान्हा से नैन मिलाये रहे-०२
ये कैसा खेल रचाया है, ये मदारी कहाँ से आया है,
मेरा सोता कुंवर जगाया है, ये मदारी कहाँ से आया है-०४
