मेरा आशिक़ रंग का काला

  • Mera Ashiq Rang Ka Kala

जिस दिन नचाए जिसको
वो दिन देखे ना रात
श्याम नचाए जिसको
वो नाचे दिन और रात

मैं मस्त हुए हू मस्ती में
ये चराचा है हर बस्ती में
रही झूम यार की मुरली पे
आमबर में मौज बरसाती में

राधा जान हमारी कह के
पीला गया वो प्याला

सूब आशिक़ है रंग गोरे के
मेरा आशिक़ रंग का काला

सूब आशिक़ है रंग गोरे के
मेरा आशिक़ रंग का काला

आएसी इश्क़ में नाचे की मेरे
पाव के बंधन टूट नाचे

प्रेम के बंधन आएसा बँधा
सारे बंधन टूट गये

नचावे को मैं मचल गयी
श्री श्याम नचवान वाला

सूब आशिक़ है रंग गोरे के
मेरा आशिक़ रंग का कला

मैं काले की काला मेरा
और चाँद ना कोई भी

चाहे कुच्छ भी कहे जमाना
श्याम दीवानी हुए रे

श्याम नाम ही जपती रहती
ये स्वासो की माला

सूब आशिक़ है रंग गोरे के
मेरा आशिक़ रंग का काला

खुले नैन में सपने देखु
सपने में भी एक सपना

और किसी से क्या करना
जब श्याम सलोना है अपना

झूठ ना बोलू कमाल सिंग ने
आएसा जादू डाला

सूब आशिक़ है रंग गोरे के
मेरा आशिक़ रंग का काला

सूब आशिक़ है रंग गोरे के
मेरा आशिक़ रंग का काला

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