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मनवा दुखी बाटे

  • Manwa Dukhi Baate

आज का जीव अपनी जिंदगी में अपने जीवन में कुछ भी प्राप्त करना चाहता है तो वो सोचता है कि मुझे शीघ्र हीं प्राप्त हो जाए बिना मेहनत के बिना संघर्ष के, और इन सब विचारों को देखते हुए करते हुए वो एक ऐसे स्थान पर पहुँच जाता है अर्थात वह बहुत हीं गलत रास्ते को अपना लेता है। आज के समाज में जीव को भगवान विश्वास नहीं है पर जादू टोने पर अत्यधिक विश्वास है। इन सामाजिक चीजों को देखते हुए एक भक्त भगवान के सन्मुख खड़े हो करके भगवन से कहता है, नाथ

मनवा दुखी बाटे देख के,
मनवा दुखी बाटे देख के, अरे विचार लोगवा के,
हो विचार लोगवा के,
प्रभु जी कैसे भागी, मन से अन्धार लोगवा के-०४
हो मनवा दुखी बाटे, देख के विचार लोगवा के,
हो विचार लोगवा के,
प्रभु जी कैसे भागी, मन से अन्धार लोगवा के-०४

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आधा गठरी ज्ञान के लेके, घूमे कोना कोना-०२
राम नाम कुछ जानत नाहीं, सिखले जादू टोना-०2
हां आधा गठरी ज्ञान के लेके, घूमे कोना कोना,
राम नाम कुछ जानत नइखे, सिखले जादू टोना,
कतहुँ मिलत नाहीं, अइसन इलाज रोगवा के,
हो इलाज रोगवा के,
प्रभु जी कैसे भागी, मन से अन्धार लोगवा के-०४

मन पंक्षी अस उड़त बाना, तन को धीर धरेला-०२
के केकरा के समझावे, सब आपन दुःख कहेला-०२
मन पंक्षी अस उड़त बाना, तन को धीर धरेला,
के केकरा के समझावे, सब आपन दुःख कहेला,
गौरांगी दुनिया बनल बा, शिकार लोगवा के,
हो शिकार लोगवा के,
प्रभु जी कैसे भागी, मन से अन्धार लोगवा के,
प्रभु जी कैसे भागी, मन के अन्धार लोगवा के,
प्रभु जी कैसे भागी, मन से अन्धार लोगवा के-०२
हो मनवा दुखी बाटे देख के, विचार लोगवा के,
हो विचार लोगवा के,
प्रभु जी कैसे भागी, मन से अन्धार लोगवा के-०५


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