कर्म हीं तेरी पूजा गीता ज्ञान

  • Karm Hin Teri Puja Geeta Gyan

ओ ओ ओ… ओम
ओ ओ ओ… ओम

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

हे मानव तू कर्म कर, फल की चिंता त्याग,
कर्म हीं तेरा धर्म है, कर्म हीं तेरा राग,
केशव की वाणी सुनले, छोड़ दे सब अभिमान,
यही है गीता का ज्ञान, यही है गीता का ज्ञान।

जय श्री कृष्णा, जय श्री कृष्णा,
जय गोविंदा, जय गोपाला,
कर्म पथ पर चलता चल तू, नाम प्रभु का ध्याय रे,
जीवन नैया कृष्णा कन्हैया, आप हीं पार लगाय रे।

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नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥
न शस्त्र जिसे काट सके, न अग्नि जला पाए,
न पानी जिसे भिगो सके, न वायु सूखा पाए,
यह आत्मा तो अमर है वन्दे, व्यर्थ करे तू शोक,
मृत्यु तो एक द्वार है केवल, गमन करे परलोक,
नश्वर है ये काया, आत्मा अजर महान,
यही है गीता का ज्ञान, यही है गीता का ज्ञान।

जय श्री कृष्णा, जय श्री कृष्णा,
जय श्री कृष्णा, जय श्री कृष्णा,
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥

जब जब धर्म की हानि हो, और पाप वधे बढ़े अपार,
तब तब मैं धरती पे लूँ, मानव का अवतार,
पाप मिटाने धर्म बचाने, मैं हीं आता हूँ,
हर युग में मैं अलग रूप धर, लीला रचाता हूँ,
मैं हीं हूँ राम मैं हीं कांधा, मैं हीं हूँ भगवान,
यही है गीता का ज्ञान, यही है गीता का ज्ञान।

जय श्री कृष्णा, जय श्री कृष्णा,
जय गोविंदा, जय गोपाला,
जय श्री कृष्णा, जय श्री कृष्णा,
जय श्री कृष्णा, जय श्री कृष्णा,
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
छोड़ के सारी चिंता तू, बस मेरी शरण में आ,
तेरे सारे पाप हरूंगा, मन में दीप जला,
मैं हीं रक्षक मैं हीं शिक्षक, मैं हीं हूँ आधार,
मेरी भक्ति से हीं होगा, तेरा बेड़ा पार,
हे अर्जुन तू युद्ध कर, धर गांडीव कमान,
यही है गीता का ज्ञान, यही है गीता का ज्ञान।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे।

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
जय श्री कृष्णा राम, जय श्री कृष्णा।


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