जहां भक्ति के दीप जले वहा राम निवास करे
जहां भक्ति के दीप जले
वहा राम निवास करे।।
जो राम भरोसे रहे
फिर उनकी आस तारे।।
जहा भक्ति के दीप जले
वहा राम निवास करे।।
जिस दिल में बस्ते है
राम कभी रुके ना उनके काम।।
जब जीवन है अनमोल
फिर राम राम तू बोल।।
जहा भक्ति के दीप जले
वहा राम निवास करे।।
मैं धन्य हुआ प्रभु वर
जन्म हू अयोध्या में।।
जहां जाने मेरे राम
वही मौत भी चाहु मैं।।
जहां भक्ति के दीप जले
वहा राम निवास करे।।
जो राम भरोसे रहे
फिर उनकी आस तारे।।
जहां भक्ति के दीप जले
वहा राम निवास करे।।
