जग असार में सार मनवा हरि हरि बोल

  • Jag Asaar Me Saar Manva Hari Hari Bol

जग असार में सार मनवा हरि हरि बोल
हरि हरि बोल राधे श्यामा बोल सीता राम बोल।।

जग असार में सार मनवा हरि हरि बोल
हरि हरि बोल राधे श्यामा बोल सीता राम बोल

जग असार में सार मनवा हरि हरि बोल
जग असार में सार मनवा हरि हरि बोल।।

इस तन की अब वीणा बनाले
तार संसो के उसके सजले।।

सरल प्रीति के स्वर से रे मन
अपने प्रभु वर को तू रिजले
पाले उन को बिन मोल मनवा हरि हरि बोल
हरि हरि बोल राधे श्यामा बोल सीता राम बोल।।

जग असार में सार मनवा हरि हरि बोल
जग असार में सार मनवा हरि हरि बोल।।

जीवन साज है एक अनोखा
सबने स्वर में करके देखा।।

सदा सदा ही रहा बेसुरा
राम प्रेम बिन बस एक धोखा
राम प्रेम अनमोल मनवा हरि हरि बोल
हरि हरि बोल राधे श्यामा बोल सीता राम बोल।।

जग असार में सार मनवा हरि हरि बोल
जग असार में सार मनवा हरि हरि बोल।।

नस नस में उसकी झनकारे
रोम रोम बस उसको पुकारे।।

अधरो पर गाथा हो उसकी
श्रवण सुने गुन उसके प्यारे
राम नाम रस घोल मनवा हरि हरि बोल
हरि हरि बोल राधे श्यामा बोल सीता राम बोल।।

ये तन तो है कच्ची माटी
ठेस लगी और बिकरी जाति
संत कहे ये जीवन पूंजी
हर पल काम होती ही रहती है
अब तो अँखे खोल मनवा हरि हरि बोल
हरि हरि बोल राधे श्यामा बोल सीता राम बोल।।

जग असार में सार मनवा हरि हरि बोल
हरि हरि बोल राधे श्यामा बोल सीता राम बोल।।

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