हे राम अब बस तेरा हीं सहारा है
छोड़ दिया जग का भ्रम, झूठी सब माया,
राम तुम्हारे चरणों में, सच्चा सुख पाया,
दर-दर भटका खोज में, मिला न कोई धाम,
मेरी नैया पार लगाओ, हे सियापती राम ।
जय श्री राम, राजा राम,
सियाराम, जय जय राम।
हे मेरे राम मुझे अपने चरणों में बिठा लो,
हां मेरे राम मुझे अपने चरणों में बिठा लो,
इस झूठे जग से राघव, मुझे अब तो बचा लो,
हे मेरे राम मुझे अपने चरणों में बिठा लो।
माया के इस अँधेरे में मैं भटक रहा हूँ राम,
तेरे सिवा ना मेरा कोई, इस जग में है धाम,
टूट चूका हूँ ठोकर खाकर,
टूट चूका हूँ ठोकर खाकर, सीने से लगा लो,
हे मेरे राम मुझे अपने चरणों में बिठा लो,
शबरी के झूठे बेरों में, तुमने प्रेम था पाया,
मैं पापी हूँ पर मैंने भी, बस तुमको हीं ध्याया,
मेरे खोटे प्रेम को भी,
मेरे खोटे प्रेम को भी, अपना तुम बना लो,
हे मेरे राम मुझे अपने चरणों में बिठा लो।
अहिल्या को पत्थर से प्रभु, तुमने तार दिया था,
केवट की उस नैया का भी बेडा पार किया था,
भव सागर की लहरों से,
भव सागर की लहरों से, मेरी नाव निकालो,
हे मेरे राम मुझे अपने चरणों में बिठा लो,
जटायु को अपने हाथों से, तुमने मोक्ष दिलाया,
दीन हीन उस वानर को भी, सीने से लगाया सीने से लगाया
इस मूरख अज्ञानी का,
इस मूरख अज्ञानी का, तुम भाग्य जगा लो,
हे मेरे राम मुझे अपने चरणों में बिठा लो,
अवधपुरी की गलियों को तरस रहे हैं नैन,
तेरे दर्श बिना हे राघव, मन को ना आये चैन,
जन्मों की इस प्यास को,
जन्मों की इस प्यास को, आ के तुम बुझा लो,
हे मेरे राम मुझे अपने चरणों में बिठा लो,
कहाँ जाऊं राम दुनिया ने बहुत सताया है,
मैंने अपना सबकुछ राघव, तेरे चरणों में लुटाया है,
हे अवधपती हे रघुनन्दन, मुझे दर्शन दे दो,
मारुती नंदन भक्ति, मुझमें कहाँ है राम,
पर सांसे जपती रहती है, आठों पहर तेरा नाम,
अपनी दया की छाँव में,
अपनी दया की छाँव में, मुझको तुम छुपा लो,
हे मेरे राम मुझे अपने चरणों में बिठा लो।
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हे मेरे राम मुझे अपने चरणों में बिठा लो,
हां मेरे राम मुझे अपने चरणों में बिठा लो,
माया के इस अँधेरे में, मैं भटक रहा हूँ राम,
तेरे सिवा ना मेरा कोई, इस जग में है धाम,
टूट चूका हूँ ठोकर खाकर,
टूट चूका हूँ ठोकर खाकर, सीने से लगा लो,
हे मेरे राम मुझे अपने चरणों में बिठा लो-०२

