हरी भज ले
मन तू हरि भज ले रे,
साधे सरल उपाय,
दूर ना मजबूत है हरि,
बस मन खोल बुलाय।
माया झूठी मोह झूठा,
मन को मत भरमाय,
नाम बिना सब धूल समान,
सांची राह बताय,
हरि को अपने भीतर देख,
दीपक मन में जलाय,
नामदेव कहे जो हरि भजे,
वही सांचे सुख पाय,
मन तू हरि भज ले रे,
हरि हीं जग का सार,
मन में हरि बस जाये जब,
कट जाये भव का भार।
और इस भजन को भी देखें: रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने
पथ में लाखों भ्रम खड़े,
मन को ना डिगाये,
हरि का नाम अमृत समान,
जीवन रंग भराय,
सांस सांस में हरि बसा,
ये सत्य समझाए,
नामदेव की वाणी गाये,
मन हरि में समाये,
मन तू हरि भज ले रे,
हरि हीं जग का सार,
मन में हरि बस जाये जब,
कट जाये भव का भार।
प्रभु के बिना कौन सहारा,
कौन तुझे अपनाये,
हरि हीं माता हरि हीं पिता,
हरि हीं सखा सहाय,
मन दे दे तू हरि को आज,
कल का भरोसा नाय,
नामदेव कहे हरि मिल जाय,
जो भक्ति रस गुनगुनाय,
हरि हीं माता हरि हीं पिता,
हरि हीं सखा सहाय,
मन तू हरि भज ले रे,
हरि हीं भगता सार,
मन में हरि बस जाये जब,
कट जाये भव का भार।

