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हरे रामा विनय सुनो त्रिपुरारी हरो दुःख भारी रे हारी

  • Hare Rama Vinay Suno Tripurari Haro Dukh Bhari Re Hari

हरे रामा विनय सुनो त्रिपुरारी, हरो दुःख भारी रे हारी-०२

भांग धतूरे आपको प्रिय हैं, नंदी के असवारी रामा-०२
हरे रामा जटा जुट सिर गंग, सदा सुखकारी रे हारी-०२

गौरा पारवती के संग में, श्री जानकी महातारी रामा-०२
हरे रामा बसहुँ सदा असुरारी, हरो दुःख भारी रे हारी-०२

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समुद्र मंथन से जब विष निकला, पीकर जग दुःख हारी रामा-०२
हरे रामा पान कियो तुम विष को, भयो त्रिपुरारी रे हारी-०२


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