हर एक डगर हर मंज़िल पर एक तेरा सहारा काफ़ी है

  • Har Ek Dagar Har Manjil Per Ek Tera Sahara Kafi Hai

हर एक डगर हर मंज़िल पर
एक तेरा सहारा काफ़ी है
मझदार में हो या साहिल पर
हे राम पुकारा काफ़ी है।।

मुझे एक अकेले क्या गम है
मैं हू तू है ये क्या कम है
मुझे एक अकेले क्या गम है
मैं हू तू है ये क्या कम है
मैं हू तू है ये क्या कम है।।

तू साथी है तो किसका दर
तू साथी है तो किसका दर
ये संग हुमारा काफ़ी है
मझधार में हो या साहिल पर
हे राम पुकारा काफ़ी है।।

हर एक डगर हर मंज़िल पर
एक तेरा सहारा काफ़ी है
मझदार में हो या साहिल पर
हे राम पुकारा काफ़ी है।।

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