चलना रे कंकाली धाम

  • Chalna Re Kankali Dhaam

कंकाली कंकाली कहती है दुनियां कंकाली काली का धाम,
सूंदर छटा में प्रगति है मैया कंकाली माँ का है नाम,
चल ना रे कंकाली धाम।।

भोपाल रायसेन के बीच में माई,
अपन भगतो को तारने आई,
तीन देव को संग में लाइ,
पावन गोदावल धाम,
अरे चल ना रे कंकाली धाम।।

बीस गुजा नर मुंडो की माला,
माँ ने रूप धरा विकराला,
माँ के अखंड ज्योत को तू भी करना प्रणाम,
चल ना रे कंकाली धाम।।

सब की सुनी है गोद है भारती
माँ ममता की किरपा है करती,
नवराति में खीर पूड़ी के भंडारे सुबहो शाम,
चल ना रे कंकाली धाम।।

चुनरी चङाना बंधन लगना,
गोबर से उलटे हाथ रंगना,
अरे कर देगी माँ जब से इधर धन,
बने गे तेरे काम,
चल ना रे कंकाली धाम।।

मिलते-जुलते भजन...