चले सीताराम लखन धीरे धीरे

  • Chale Sitaram Lakhan Dheere Dheere

चले सीताराम लखन धीरे धीरे
छोड़ अयोध्या गांगजी के तीरे

चले सीताराम लखन धीरे धीरे
छोड़ अयोध्या गांगजी के तीरे

केवट बोला चरण मैं धौ
चरनो की महिमा है भारी
तारी अहिल्या मुझको भी तारो
लू नही मैं उतरई

बाद भागी वो तार गया केवट
नाव चलाए वो धीरे धीरे

चले सीताराम लखन धीरे धीरे
छोड़ अयोध्या गांगजी के तीरे

सोने के मृग देख सिया ने
राम को था भिजवाया
हे लक्ष्मण ये शब्दो को सुनकर
सीता का मान घबराया

लक्ष्मण रेखा खीच के जाते
रावण आया फिर धीरे धीरे

चले सीताराम लखन धीरे धीरे
छोड़ अयोध्या गांगजी के तीरे

सीता हरण किया धोखे से
रावण अत्याचारी
देख जटायु आए झपट के
युध किया था भारी
राम काज में टन को लगाकर
तोड़े जटायु दम धीरे धीरे

चले सीताराम लखन धीरे धीरे
छोड़ अयोध्या गांगजी के तीरे

सिताजी की खोज में भटके
राम लखन दौ भाई
ब्राह्मण भेष में बजरंग आए
हुए सुग्रीव मिताई
बाली का वध करने प्रभुजी
बान चढ़ाये फिर धीरे धीरे

चले सीताराम लखन धीरे धीरे
छोड़ अयोध्या गांगजी के तीरे

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