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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

विविध भजन

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थारो दूध छे केवल ब्रम्ह संजोणी हरी की कामधेनु हो

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अरज म्हारी सुणता जाजो जी

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भरोसे थारे चाले हो गुरुजी म्हारी नाव

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समझी लेवो रे मना भाई अंत नी होय कोई आपणा

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आनंद मंगलाचार सिंगाजी घर आनंद मंगलाचार

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सतगुरु सिंगाजी महाराज की संध्या आरती

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म्हारा सिंगाजी दुनिया म हुया रे महान

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कसो तज्यो रे लाडिला भइया रे मख कसो तज्यो लाडिला

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पीवजी मन मत करजो उदास सदा तुम हासी न रहजो जी

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चार दिनों का ताप ये कैसा फिर विपदा है लाई

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