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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

विविध भजन

विविध भजन

हर फिकर को धुएं में उड़ाता चला गया

विविध भजन

पानी में नहाते हो कभी सत्संग मै नहाया करो

विविध भजन

खेतरपाल दा कहंदा गुलाम आ गया

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साडे वल मुखड़ा मोड़ वे प्यारेया

विविध भजन

युग युग जीवे तू माँ

विविध भजन

तेरी ऊँगली पकड़ के चला

विविध भजन

पिता का साया है

विविध भजन

मन उसी की करो प्रार्थना

विविध भजन

न धुप रहनी न छा बन्देया

विविध भजन

मन दे तू पीछे न लगी मन नु स्मजौना है तू

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