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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

विविध भजन

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दर्द बनकर के जिसके दिल में सुंदर श्याम आता है

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गीता ज्ञान सुण्या कर बन्दे परले पार उतर जैगा

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माँ बाप की इस कलयुग में किस तरह कटे जिंदगानी

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हो जड़ चेतन के माली

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ना कभी भी किसी का दिल का दुखाना रे

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नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का

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झुंझुनूं में विराजे गंगाराम जी

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गंगाराम तेरा सुमिरन रोज करूँ

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शब्द संभाल के बोलिये शब्द के हाथ न पाँव रे

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बाबा मुझे दर पे बुलाना तेरा धाम रूनिचा है सुहाना

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