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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

विविध भजन

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दुःख नगरी से प्रीत लगाई

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दुःखियों को तारने वाले

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शिप्रा मैया आरती

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प्रार्थना हो दया का दान प्रभु

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कैसे कह दें देखा नहीं तुमको प्रभुजी

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नारी ने नर को जनम दीया क्या खेल रचाया नारी ने

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दुख दर्द यहाँ सहता है सच बोलने वाला

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औरों के हित जो जीता है

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भजो रे बूढ़ी खेरमाई

विविध भजन

कलियुग में आई यह कैसी घड़ी

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