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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

विविध भजन

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तेरी है ज़मीन तेरा आसमां

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तुम अन्धेरे में ज्योति मेरी नैया के मांझी

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कृपा रे थारी मोहे करुणा कर दीजो

विविध भजन

होश आता है बशर को उम्र ढल जाने के बाद

विविध भजन

हम परदेसी फकीर कोई दिन याद करोगे

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ईश्वर को जान बंदे मालिक तेरा वही है

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माटी के पूतले तुझे कितना गुमान है

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आज के इस इंसान को ये क्या हो गया

विविध भजन

भजन करो जी मेरी सासू जी

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भटकता डोले काहे प्राणी

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