ब्रिज की छोरी खेले क्यूँ ना होली
ब्रिज की छोरी खेले क्यूँ ना होली
ब्रिज की छोरी खेले क्यूँ ना होली
रंग लगवाले बात मान मोरी
सिंगर – सरिता सरगम अयोध्या वासी, विनय सिंग निराला
ब्रिज की छोरी खेले क्यूँ ना होली
रंग लगवाले बात मान मोरी
तेरी बतो में मैं नही अओ
तोसे रंग मैं ना लाग्वौ
गोरे गोरे गालो पे मैं
तोसे ना रंग लाग्वौ
मेरा कन्हैया मान राधिका
तुझको मैं समझोउ
कान्हा छोड़ दे मोरी कलाई
ना तो होवेगी तोसे लड़ाई
नाही बहिया मरोड़ो मोरी
ब्रिज की छ्होरी खेले क्यूँ ना होली
रंग लगवाले बात मान मोरी
मारो मत पिचकारी कान्हा
भीगे मोरी चुनरिया
होरी ना मोसे खेलेगी
तो फोड़ू तेरी गागारिया
नाही मोसे करो वरज़ोरी
आएसए रंगो ना चुनरिया मोरी
कार्दूनगी शिकायत टोरी
ब्रिज की छोरी खेले क्यूँ ना होली
रंग लगवाले बात मान मोरी
मानेगी ना तेरी राधा चाहे जितना मनाओ
मुरली बजा के तुमको सूनाओ इतना नही सताओ
अब मानूँगी तेरी राधा खेलेगी कान्हा से होली
बनी तोसे प्रीत की डोरी
ब्रिज की छोरी खेले संगे होली
रंग लगवाले बात माने मोरी



