बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो।।
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो।।
हे हरि कीर्तन का अमृत जीवन में घोलो
हरि बोलो
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो।।
जनम लिया देवकी माई से जिसके मथुरा धाम में
जसुदा के अंगना पालना झूले हरि गोकुल गाओ में।।
ब्रज का दुलारा जो था हो हो ओ
ब्रज का दुलारा जो था हो हो ओ
ब्रज का दुलारा जो था आंखों का तारा
ब्रज का दुलारा जो।।
उसी का भजन करो पवन हो लो
हरि बोलो
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो।।
ग्वाल बाल संग बल पाने में किसने चराई गई
बना गोपिया का प्यारा जो नटखट कृष्ण कन्हैया
कंस को जिस्ने मारा ओ
कंस को जिसको मारा जग को उबरा
कंस को जिसको मारा जग को जिसको उबरा।।
उसकी भक्ति के जल से मानव को ढोलो रे
हरि बोलो
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो।।
गीता गाय युद्ध क्षेत्र में जिसके सारथी वेश में
कर्म योग का ज्ञान भरा है जिसके हर उपदेश में
ईश्वर अविनाशी जो है हो हो ओ ओ
ईश्वर अविनाशी जो है घाट घाट का वासी
ईश्वर अविनाशी जो है घाट घाट का वासी जो है
सब में उसी को देखो नैन मन के खोलो।।
हरि बोलो
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो।।
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो।।
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो
बोलो रे हरि बोलो रे कृष्णा बोलो बोलो।।


