बंसी बजा के किधर गयो रे मोरे बनके साँवरिया
Bansi Bajake Kidhar Gayo Re More Banke Sanwariya
बंसी बजके किधर गयो रे मोरे बनके साँवरिया
जबसे सुनी तेरी बैरन मुरलिया
दिन को नही चैन ना रात नही नीडिया
जाने क्या जादू कर गयो रे मेरे बनके साँवरिया
बंसी बजा के किधर गयो रे मोरे बनके साँवरिया
बैरन हो गयी रातो की नीडिया
भूल साकु ना श्याम की सुरतिया
भूल साकु ना सवली सुरतिया
घाव कलेजा में कर गयो रे मोरे बनके साँवरिया
बंसी बजके किधर गयो रे मोरे बनके साँवरिया
तेरे मिलन को जियरा तरसे
नैन मेरे सावन से बरसे
बरस बरस घर भर गयो रे
मोरे बनके साँवरिया
बंसी बजा के किधर गयो रे मोरे बनके साँवरिया

