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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

विविध भजन

घना दिन सो लियो रे अब तो जाग मुसाफिर जाग

मंत्र एवं स्तोत्रम् | विविध भजन

कुशेश्वर नाथ स्त्रोत्र

ganga dhara mein amrit ki hai tajagi
देव दीपावली भजन | विविध भजन

गंगा धारा में अमृत की है ताजगी

deep jalayen bhagya jagayen aai dev diwali
देव दीपावली भजन

दीप जलाएं भाग्य जगाएं आई देव दिवाली

विविध भजन

हांरे खेल खिलाड़ियों का

विविध भजन

मैं तेरे कदमों में पनाह चाहता हूं

विविध भजन

सारे जग नू रंगन वाले मेरा मन रंग दे

विविध भजन

मैनूं प्यारी लगदी है शाम जी तेरी बंसरी वजदी

विविध भजन

बन्दे तज दे नादानी तू क्यों पाप कमाए

विविध भजन

आई खुशियों की यह सौगात

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