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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

विविध भजन

क्या तन माँजता रे एक दिन माटी में मिल जाना

विविध भजन

अगर दिल किसी का दुखाया ना होता

विविध भजन

सुन बहना मेरी बहना

विविध भजन

तीन बार भोजन भजन इक बार उसमे भी आते है विघन हजार

विविध भजन

तेरी है ज़मीन तेरा आसमां

विविध भजन

तुम अन्धेरे में ज्योति मेरी नैया के मांझी

विविध भजन

कृपा रे थारी मोहे करुणा कर दीजो

विविध भजन

होश आता है बशर को उम्र ढल जाने के बाद

विविध भजन

हम परदेसी फकीर कोई दिन याद करोगे

विविध भजन

ईश्वर को जान बंदे मालिक तेरा वही है

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