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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

karo karo ganga snan
कार्तिक पूर्णिमा स्पेशल | गंगा स्नान विशेष | देव दीपावली भजन

करो करो गंगा स्नान

विविध भजन

मन के बहकावे में ना आ

विविध भजन

जो पराया दर्द अपनाए उसे इंसान कहते हैं

विविध भजन

यहां कोई नहीं अपना दुनिया ही बेगानी है

विविध भजन

तू ढोल बजा लाँगुरिया

विविध भजन

तूने जो कमाया है

विविध भजन

सासु पूछे बहुल से तू क्या लाई पीहर से

विविध भजन

मिटे से मिटती नहीं है कर्म की लकीर रे

विविध भजन

अपने ही कर्मों का दोष

विविध भजन

मैंने मानुष जनम तुझको हीरा दिया

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