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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

विविध भजन

थारो दूध छे केवल ब्रम्ह संजोणी हरी की कामधेनु हो

विविध भजन

अरज म्हारी सुणता जाजो जी

विविध भजन

भरोसे थारे चाले हो गुरुजी म्हारी नाव

विविध भजन

समझी लेवो रे मना भाई अंत नी होय कोई आपणा

विविध भजन

आनंद मंगलाचार सिंगाजी घर आनंद मंगलाचार

विविध भजन

सतगुरु सिंगाजी महाराज की संध्या आरती

विविध भजन

म्हारा सिंगाजी दुनिया म हुया रे महान

विविध भजन

कसो तज्यो रे लाडिला भइया रे मख कसो तज्यो लाडिला

विविध भजन

पीवजी मन मत करजो उदास सदा तुम हासी न रहजो जी

विविध भजन

चार दिनों का ताप ये कैसा फिर विपदा है लाई

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