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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

विविध भजन

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं

विविध भजन

भला किसी का कर ना सको तो

विविध भजन

छोड़ झमेला झूठे जग का

विविध भजन

नदिया ना पिए कभी अपना जल

विविध भजन

क्या दम का भरोसा यार दम आये या ना आये

विविध भजन

तेरे पूजन को भगवान बना मन मंदिर आलीशान

विविध भजन

प्रभु खिचे हुए बंधे हुए चले आयेंगे

विविध भजन

मत कर तू अभिमान रे बंदे जूठी तेरी शान रे

विविध भजन

जिनके हृदय श्री राम बसे तिन और का नाम लियो ना लियो

विविध भजन

दो गज कफ़न का टुकड़ा तेरा लिबास होगा

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