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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

विविध भजन

मेरे विश्वास को थोड़ा सा सहारा दे दो

विविध भजन

न कहीं से दूर हैं मंजिलें

विविध भजन

दर्द बनकर के जिसके दिल में सुंदर श्याम आता है

विविध भजन

गीता ज्ञान सुण्या कर बन्दे परले पार उतर जैगा

विविध भजन

माँ बाप की इस कलयुग में किस तरह कटे जिंदगानी

विविध भजन

हो जड़ चेतन के माली

विविध भजन

ना कभी भी किसी का दिल का दुखाना रे

विविध भजन

नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का

विविध भजन

झुंझुनूं में विराजे गंगाराम जी

विविध भजन

गंगाराम तेरा सुमिरन रोज करूँ

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