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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

जैन भजन

रम गई माँ मेरे रोम रोम में

जैन भजन

दे दो अब दर्शन तिहारे आए हैं चरणों में तुम्हारे

जैन भजन

ऊंचा पर्वत थी आवो ने भैरूजी

जैन भजन

मैं तो आवियों रे, दर्शन दिजो भैरू दादा

जैन भजन

तुमरे बिन हमरा कौन यहां

जैन भजन

भैरू रो दरबार, जग में सबसुं न्यारो हैं

जैन भजन

मेरा एक साथी हैं

जैन भजन

श्री मति माँ तेरा लाला कितना भोला भाला है

जैन भजन

छोड़ेंगे ना हम तेरे साथ ओ दादा मरते दम तक

विविध भजन

म्हाने सेवा रो अवसर दिजो राज भैरु दादा रंगीला

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