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देवकी के ललनवा

  • Devaki Ke Lalanwa

जय हो !
जय हो !
प्रेम से बोलिये कृष्ण गोपाल की-जय हो !

और आइये देखिये माता देवकी के आठवां संतान श्री भगवान हरी नारायण कृष्ण जी का जन्म हुआ है, और इनका जन्म भादव के कृष्ण पक्ष अष्टमी के रात जेल में जन्म में हुआ है जिसमें रोहिणी नक्षत्र है और कैसे सब मंगल गए रहे हैं !

ए हो देवकी के ललनवा, ए हो देवकी के हो देवकी के ललनवा,
आ गइलें जग के पालनहार, ए हो देवकी के ललनवा-०३
ए हो देवकी के ललनवा, ए हो देवकी के हो देवकी के ललनवा-०२
हाँ आ गइलें जग के पालनहार, ए हो देवकी के ललनवा,
आ गइलें जग के पालनहार, ए हो देवकी के ललनवा-०२
जय हो !

जय जय !

आ गइलें जग के पालनहार, ए हो देवकी के ललनवा-०२
खुलल हथकड़िया हाथ के पैर के जंजीरवा, ए हो देवकी के ललनवा-०२
हाँ खुलल हथकड़िया हाथ के पैर के जंजीरवा, ए हो देवकी के ललनवा,
खुल गेले बज्र केबाड़, ए हो देवकी के ललनवा- ०२
जय जय !
खुल गेले बज्र केबाड़, ए हो देवकी के ललनवा।

खुल गेले बज्र केबाड़, ए हो देवकी के ललनवा-०२
नन्द बाबा लेके चलले गोकुल नागरिया, ए हो देवकी के ललनवा-०३
लह-लह लहरे गंगा धार, ए हो देवकी के ललनवा-०२
बोलिये कृष्ण कन्हैया लाल की-जय !

कृष्णाष्टमी विशेष : हैप्पी बर्थडे टू यू कृष्णा

लह-लह लहरे गंगा धार, ए हो देवकी के ललनवा-०२
बाजे बधाईया सखियाँ मंगल गावें, ए हो यशोदा के घर में-०३
यहूदा लुटावे निर्मल हार, ए हो देवकी के ललनवा-०४
बोलिये कृष्ण कन्हैया लाल की-जय हो !
जग के पालनहार की- जय हो !
जग के तारणहार की- जय हो !


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