शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम
शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम,
नारद के वीणा से निकला पतित पावन सीताराम,
शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम,
नारद के वीणा से निकला पतित पावन सीताराम-०४
पतित पावन सीताराम।
अर्जुन के धनुष से निकला जय मधुसूदन जय घनश्याम,
द्रौपदी के आग से निकला भक्त के रक्षक हैं भगवान,
अर्जुन के धनुष से निकला जय मधुसूदन जय घनश्याम,
द्रौपदी के आग से निकला भक्त के रक्षक हैं भगवान,
शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम,
नारद के वीणा से निकला पतित पावन सीताराम-०४
पतित पावन सीताराम।
शबरी के बेरों से निकला भाव के भूखे हैं भगवान,
भक्त प्रह्लाद के मुख से निकला तुझमे राम और मुझमे राम,
शबरी के बेरों से निकला भाव के भूखे हैं भगवान,
भक्त प्रह्लाद के मुख से निकला तुझमे राम और मुझमे राम,
शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम,
नारद के वीणा से निकला पतित पावन सीताराम-०४
पतित पावन सीताराम।
और इस भजन को भी देखें: मेरे तन में भी शिव मेरे मन में भी शिव
बृज की कुञ्ज गली से निकला जय गुरुदाता जय गुरु नाम,
चार वेद छे शास्त्र पुकारे हरी ॐ हरी ॐ सीताराम,
बृज की कुञ्ज गली से निकला जय गुरुदाता जय गुरु नाम,
चार वेद छे शास्त्र पुकारे हरी ॐ हरी ॐ सीताराम,
शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम,
नारद के वीणा से निकला पतित पावन सीताराम-०४
पतित पावन सीताराम-०२




