नगर में जोगी आया
नगर में जोगी आया,
नगर में जोगी आया, भेद कोई समझ ना पाया,
अजब है तेरी माया, घर घर अलख जगाया,
सबसे बड़ा है तेरा नाम,
भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ, हे भोलेनाथ।
अंग विभूति गले में रुद्राक्ष माला शेषनाग लिपटायो,
आड़ो तिलक भाल चन्द्रमा घर घर अलख जगायो,
नगर में-०२
नगर में जोगी आया, भेद कोई समझ ना पाया,
अजब है तेरी माया, यशोदा के घर आया,,
सबसे बड़ा है तेरा नाम,
भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ, हे भोलेनाथ।
ले भिक्षा निकली नन्द रानी कंचन थाल भरायो,
लो भिक्षा जोगी जाओ जंगल में मेरो लाल डरायो
नगर में-०२
नगर मैं जोगी आया, भेद कोई समझ ना पाया,
अजब है तेरी माया, घर घर अलख जगाया,
सबसे बड़ा है तेरा नाम,
भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ, हे भोलेनाथ।
ना चाहिए तेरी दौलत दुनिया ना हीं कंचन माया,
अपने लाल का दरश करा दे मैं दर्शन को आया,
नगर में-०२
नगर में जोगी आया, भेद कोई समझ ना पाया,
अजब है तेरी माया, घर घर अलख जगाया,
सबसे बड़ा है तेरा नाम,
भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ, हे भोलेनाथ।
और इस भजन को भी देखें: गौरा झूला झूल रही भोलेनाथ संग
हूँ पंचवार परिक्रमा करके श्रृंगी नाद बजायो,
धन्य-धन्य तो माता यशोदा जुग जुग जीवे तेरो जायो,
नगर में-०२
नगर में जोगी आया, भेद कोई समझ ना पाया,
अजब है तेरी माया, गजब का खेल दिखाया,
सबसे बड़ा है तेरा नाम,
भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ, हे भोलेनाथ,
भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ -०४

